Month: May 2018

Tularam Vs. State of Madhya Pradesh-2/5/2018

MURDER-DISTINCTION BETWEEN MURDER AND CULPABLE HOMICIDE EXPLAINED-Section 300 of the IPC explains what is murder and it provides that culpable homicide is murder if the act by which the death is caused is done with the intention of causing death or the act complained of is so imminently dangerous that it must in all probability cause death or “such bodily injury as is likely to cause death.

Or – The meaning of

In order to steer clear of the above interpretation of Section 11 (2) learned counsel for the employees put forward the argument that the word ‘or’ occurring in the section should not […]

LEGAL UPDATES

ADOPTION BAIL AND BOND BUSINESS CHRISTIAN CIVIL CIVIL COURT CRIMINAL CRIMINAL TRIAL UPDATES CONSTITUTIONAL DIVORCE DOMESTIC VIOLENCE HINDU INDUSTRIAL INTELLECTUAL PROPERTY LABOUR LAND REFORM MARRIAGE MUSLIM PROBATE REAL ESTATE SUCCESSION

Maharishi Dayanand Saraswati on Christianity[ 1875]

जो यह बाइबल का मत है कि वह केवल ईसाइयों का है सो नहीं किन्तु इससे यहूदी आदि भी गृहीत होते हैं। जो यहां तेरहवें समुल्लास में ईसाई मत के विषय में लिखा है इसका यही अभिप्राय है कि आजकल बाइबल के मत में ईसाई मुख्य हो रहे हैं और यहूदी आदि गौण हैं। मुख्य के ग्रहण से गौण का ग्रहण हो जाता है, इससे यहूदियों का भी ग्रहण समझ लीजिये। इनका जो विषय यहां लिखा है सो केवल बाइबल में से कि जिसको ईसाई और यहूदी आदि सब मानते हैं और इसी पुस्तक को अपने धर्म का मूल कारण समझते हैं। इस पुस्तक के भाषान्तर बहुत से हुए हैं जो कि इनके मत में बड़े-बडे़ पादरी हैं उन्हीं ने किये हैं। उनमें से देवनागरी व संस्कृत भाषान्तर देख कर मुझको बाइबल में बहुत सी शंका हुई हैं। उनमें से कुछ थोड़ी सी इस १३ तेरहवें समुल्लास में सब के विचारार्थ लिखी हैं। यह लेख केवल सत्य की वृद्धि औेर असत्य के ह्रास होने के लिये है न कि किसी को दुःख देने वा हानि करने अथवा मिथ्या दोष लगाने के अर्थ ही।

Maharishi Dayanand Saraswati on Islam[ 1875]

चौदहवें समुल्लास   अनुभूमिका (४) जो यह १४ चौदहवां समुल्लास मुसलमानों के मतविषय में लिखा है सो केवल कुरान के अभिप्राय से। अन्य ग्रन्थ के मत से नहीं क्योंकि मुसलमान कुरान पर ही […]

Satyarth Prakash- Maharishi Dayanand Saraswati[ 1875]

भूमिका ओ3म् अथ सत्यार्थप्रकाशः श्रीयुत् दयानन्दसरस्वतीस्वामिविरचितः दयाया आनन्दो विलसति परस्स्वात्मविदितः सरस्वत्यस्यान्ते निवसति मुदा सत्यशरणा। तदा ख्यातिर्यस्य प्रकटितगुणा राष्ट्रिपरमा स को दान्तः शान्तो विदितविदितो वेद्यविदितः।। 1।। सत्यार्थ प्रकाशाय ग्रन्थस्तेनैव निर्मितः। वेदादिसत्यशास्त्राणां प्रमाणैर्गुणसंयुतः।। 2।। […]