Stotram

अविकाराय शुद्धाय नित्याय परमात्मने – Avikaraya suddaya nitya paramatmane

अविकाराय शुद्धाय नित्याय परमात्मने।
सदैकरूपरूपाय विष्णवे सर्व्वजिष्णवे।। १.२१ ।।

नमो हिण्यगर्भाय हरये शङ्कराय च।
वासुदेवाय ताराय सर्गस्थित्यन्तकर्म्मणे।। १.२२ ।।

एकानेकस्वरूपाय स्थूलसूक्ष्मात्मने नमः।
अव्यक्ताव्यक्तभूताय विष्णवे मुक्तिहेतवे।। १.२३ ।।

सर्गस्थितिविनाशाय जगतो योऽजरामरः।
मूलभूतो नमस्तस्मै विष्णवे परमात्मने।। १.२४ ।।

आधारभूतं विश्वस्याप्यणीयांसमणीयसाम्।
प्रणम्य सर्व्वभूतस्थमच्युतं पुरुषोत्तमम्।। १.२५ ।।।

ज्ञानस्वरूपमत्यन्तं निर्म्मलं परमार्थतः।
तमोवार्थस्वरूपेण भ्रान्तिदर्शनतः स्थितम्।। १.२६ ।।

विष्णुं ग्रसिष्णुं विश्वस्य स्थितौ सर्गे तथा प्रभुम्।
सर्व्वज्ञं जगतामौशमजमक्षयमव्ययम्।। १.२७ ।।


ब्रह्मपुराणम्/अध्यायः-१

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