CIVIL

Hindi E-Books

  • अथातोभक्तिजिज्ञासा-Explanation of Sandilya Bhakti Sutram by OSHO - ओम् अथातोभक्तिजिज्ञासा।।1।। सापरानुरक्तिरीश्वरे।।2।। तत्संस्थास्यामृतत्वोपदेशात्।।3।। ज्ञानमितिचेन्नद्विषतोऽपिज्ञानस्यतदसस्थिते:।।4।। तयोपक्षयाच्च।। 5।।
  • आर्थिक विज्ञान में Sveriges Riksbank पुरस्कार 2019 - कार्यकारी सारांश: गरीब परिवार निवारक उपायों में इतना कम निवेश क्यों करते हैं? इसका एक उदाहरण यह है कि टीकाकरण के लिए जिम्मेदार स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारी अक्सर काम से अनुपस्थित रहते हैं। बनर्जी, Duflo […]
  • आशा-जयशंकर प्रसाद-Asha -Jaishankar Prasad - उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित कालरात्रि भी जल में अंतर्निहित हुई । वह विवर्ण मुख त्रस्त प्रकृति का आज लगा हँसने फिर से , वर्षा बीती, हुआ सृष्टि में शरद-विकास नये सिर से।
  • ईश्वरनामव्याख्या-The Name of Iswara- Dayananda Saraswati - ओंकार शब्द परमेश्वर का सर्वोत्तम नाम है ओ३म्सच्चिदानन्देश्वराय नमो नमःअथ सत्यार्थप्रकाशः॥ ओ३म् शन्नो॑ मि॒त्रः शं वरु॑णः॒ शन्नो॑भवत्वर्य्य॒मा । शन्न॒इन्द्रो॒बृह॒स्पति॑ शन्नो॒ विष्णु॑रुरुक्र॒मः ॥ नमो॒ ब्रह्म॑णे नम॒स्ते वायो त्वमे॒व प्र॒त्यक्षं॒ ब्रह्ना॑ति । त्वामे॒व प्र॒त्यक्षं॒ […]
  • ईश्वरप्रणिधानाद्वा( 23) Iswar Pranidhanad Ba-पंतजलि: योगसूत्र- Explanation by OSHO -  तुम बीज हो, और परमात्मा प्रस्‍फुटित अभिव्यक्ति है। तुम बीज हो और परमात्मा वास्तविकता है। तुम हो संभावना; वह वास्तविक है। परमात्मा तुम्हारी नियति है, और तुम कई जन्मों से अपनी नियति पास रखे हुए हो बिना उसकी ओर देखे। क्योंकि तुम्हारी आंखें कहीं भविष्य में लगी होती हैं; वे वर्तमान को नहीं देखतीं। यदि तुम देखने को राजी हो तो यहीं, अभी, हर चीज वैसी है जैसी होनी चाहिए। किसी चीज की जरूरत नहीं। अस्तित्व संपूर्ण है हर क्षण। यह कभी अपूर्ण हुआ ही नहीं; यह हो सकता नहीं। यदि यह अपूर्ण होता, तो यह संपूर्ण कैसे हो सकेगा? फिर कौन इसे संपूर्ण बनायेगा?
  • Sexual harassment in work place काम के स्थान पर यौन उत्पीड़न: एक भारतीय संदर्भ - "यौन उत्पीड़न"  एक विशेष भाषा या कुछ इशारों का उपयोग करके या एक विशेष तथ्य बताते हुए, यहां तक कि विशेष रूप से यौन उत्पीड़न के रूप में इन कार्यों को फोन किए एक महिला का उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न हो सकता है.
  • चिंता-जयशंकर प्रसाद-CHINTA -Jaishankar Prasad - हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह, एक पुरुष, भींगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह । नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन, एक तत्व की ही प्रधानता-कहो उसे जड़ या चेतन ।
  • देखा तो हर मुकाम तेरी रहगुजर में है-एस धम्‍मो सनंतनो- Esha Dhammo Sanatana-OSHO - खोपड़ी से मुक्त होने का खयाल भी खोपड़ी का ही है। मुक्त होने की जब तक आकांक्षा है, तब तक मुक्ति संभव नहीं। क्योंकि आकांक्षा मात्र ही, आकांक्षा की अभीप्सा मन का ही जाल और खेल है। मन संसार ही नहीं बनाता, मन मोक्ष भी बनाता है। और जिसने यह जान लिया वही मुक्त हो गया।
  • नागरिकता (संशोधन) अधिनियम २०१ ९ - अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय से संबंधित कोई भी व्यक्ति, जो दिसंबर, 2014 के 31 वें दिन या उससे पहले भारत में प्रवेश कर गया हो इस पर बनाए गए किसी भी नियम या आदेश को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा
  • पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों की सूची - अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में कोई आयु-बार नहीं है। अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में आयु छड़ भी हटा ली गई है।
  • महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम, 1958 - बंबई राज्य में टिकटों और स्टाम्प ड्यूटी से संबंधित कानून को समेकित और संशोधित करने के लिए एक अधिनियम
  • मेरी प्रिय पुस्तकें- My Favourite Books – OSHO - मौन अपने ही ढंग से बोलता है, आनंद का, शांति का, सौंदर्य का और आशीषों का अपना ही गीत गाता है; अन्यथा न तो कभी कोई ‘ताओ तेह किंग’ घटित होती और न ही कोई ‘सरमन ऑन दि माउंट।’ इन्हें मैं वास्तविक काव्य मानता हूं जब कि इन्हें किसी काव्यात्मक ढंग से संकलित नहीं किया गया है। ये अजनबी हैं। इन्हें बाहर रखा गया है। एक तरह से यह सच भी है: इनका किसी रीति, किसी नियम, किसी मापदंड से कुछ लेना-देना नहीं है; ये उन सबके पार हैं, इसलिए इन्हें एक किनारे कर दिया गया है।
  • रसो वै सः- Raso vi sha- OSHO Upanisad - सूत्र है- ‘रसो वै सः।’सीधा साधा अर्थ है : ‘वह रसरूप है।’ लेकिन अनुवाद में तुम देखते हो फर्क हो गया: ‘भगवान रसरूप है।’ ‘वह' तत्काल भगवान हो गया! वह! का मजा और भगवान में बात बिगड़ गयी; वह न रही। क्योंकि भगवान का अर्थ हो गया व्यक्ति।’वह’ तो निवैंयक्तिक सम्बोधन था। भगवान का अर्थ हो गया राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर-व्यक्ति। व्यक्ति ही भगवान हो सकता है। जब भी हम ‘ भगवान’ शब्द का उपयोग करते हैं, तो वह व्यक्तिवाची हो जाता है।
  • संतति-नियमन या परिवार नियोजन-OSHO - गरीब की सबसे बड़ी जो दुविधा है, वह है प्राइवेसी का अभाव–भोजन नहीं, कपड़े नहीं। गरीब का सबसे बड़ा दुख है कि उसकी प्राइवेट जिंदगी नहीं हो सकती। वह अगर अपनी पत्नी से भी बात कर रहा हो तो भी पड़ोसी सुनता है। वह अपनी पत्नी से भी प्रेम नहीं कर सकता बिना इसके कि उसके बेटे-बेटी जान लें। गरीब की सबसे बड़ी तकलीफ है कि वह अकेले में नहीं हो सकता। उसकी प्राइवेसी जैसी कोई चीज नहीं है।
  • सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया:-धर्म है परम भोग-OSHO Upanisad - जीसस ने दो वचन कहे हैं। अलग—अलग कहे हैं! मैं कभी—कभी हैरान होता हूं क्यों अलग—अलग कहे हैं! एक वचन तो कहा है : 'अपने शत्रु को भी उतना ही प्रेम करो, जितना अपने को।’ और दूसरा वचन कहा है. 'अपने पड़ोसी को भी उतना ही प्रेम करो, जितना अपने को!' मैं कभी—कभी सोचता हूं कि जीसस से कभी मिलना होगा कहीं, तो उनसे कहूंगा कि दो बार कहने की क्या जरूरत थी! क्योंकि पड़ोसी और दुश्मन कोई अलग—अलग थीड़े ही होते हैं। एक ही से बात पूरी हो जाती है कि अपने को जितना प्रेम करते हो, उतना ही पड़ोसी को करो। पड़ोसी के अलावा और कौन दुश्मन होता है? दुश्मन होने के लिए भी पास होना जरूरी है ना! जो दूर है, वह तो दुश्मन नहीं होता।
  • Chinta – hindi poetry by Jaisankar Prasad - हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह, एक पुरुष, भींगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह । नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन, […]
  • Saral Hindi Vidhi Vakya Kosha by Legislative Dept Govt of India:१०० सरल हिंदी विधि बाक्य कोष - १०० सरल हिंदी विधि बाक्य कोष : लेजिस्लेटिव डिपार्टमेंट गोवेर्मेंट ऑफ़ भारत देवनागरी अक्षरमाला SIMPLE HINDI SENTENCES(PDF) Saral Hindi Vakyakosh SIMPLE HINDI SENTENCES(PDF)

Categories: CIVIL

Tagged as: