Isavasya-Upanishad-Translated by Friedrich Max Müller-1879

Friedrich Max Müller was ignorant of reading Sanskrit Devanagari Text , therefore he depended on some third party materials before translating the Isa Upanisad. He made several errors due to lack of knowledge on actual Sanskrit. He simply wanted his European readers to know about Hindu religion and their sacred texts. He never visited India either to learn Sanskrit or tutored by any  Indian Sanskrit scholar

परमात्मा से वेदोत्पत्ति में वेद का प्रमाण-दयानन्दसरस्वती

प्रथम ईश्वर को नमस्कार और प्रार्थना करके पश्चात् वेदों की उत्पत्ति का विषय लिखा जाता है, कि वेद किसने उत्पन्न किये हैं। (तस्माद् यज्ञात् सर्वहुतः) सत् जिसका कभी नाश नहीं होता, आनन्द जो सदा सुखस्वरूप और सबको सुख देनेवाला है, इत्यादि लक्षणों से युक्त पुरुष जो सब जगह में परिपूर्ण हो रहा है, जो सब मनुष्यों के उपासना के योग्य इष्टदेव और सब सामर्थ्य से युक्त है, उसी परब्रह्म से (ऋचः) ऋग्वेद, (यजुः) यजुर्वेद (सामानि) सामवेद और (छन्दांसि) इस शब्द से अथर्ववेद भी, ये चारों वेद उत्पन्न हुए हैं।

ब्रह्मसूत्रम् – अधिकरणानि

जिज्ञासाधिकरणम् जन्माद्यधिकरणम् शास्त्रयोनित्वाधिकरणम् समन्वयाधिकरणम् ईक्षत्यधिकरणम् आनन्दमयाधिकरणम् अन्तरधिकरणम् आकाशाधिकरणम् प्राणाधिकरणम् ज्योतिश्चरणाधिकरणम् प्रतर्दनाधिकरणम् सर्वत्रप्रसिद्ध्यधिकरणम् अत्त्रधिकरणम् गुहाप्रविष्टाधिकरणम् अन्तराधिकरणम्

তারকব্রহ্মযোগ-তস্মাৎ সর্ব্বেষু কালেষু যোগযুক্তো ভবার্জ্জুন

হে পুরুষোত্তম ! সেই ব্রহ্ম কি ? অধ্যাত্ম কি ? কর্ম্ম কি ? এবং অধিভূত কাহাকে বলে ? কাহাকেই বা অধিদৈব বলা যায় ? হে মধুসূদন ! এই দেহে অধিযজ্ঞ কে ?এবং এই দেহে কি প্রকারে অবস্থিত আছেন ? এবং মরণকালে সংযতচিত্ত মানবগণকর্ত্তৃক তুমি কি প্রকারে জ্ঞেয় হও ?

चोदनालक्षणोऽर्थो धर्मः-शबरभाष्यम् Chodana Lakshn Artha Dharma

चोदनालक्षणोऽर्थो धर्मः-चोदनेति क्रियायाः प्रवर्तकं वचनम् आहुः. आचार्य चोदितः करोमीति हि दृश्यते. लक्ष्यते येन, तल् लक्षणम्. धूमो लक्षणम् अग्नेर् इति हि वदन्ति. तया यो लक्ष्यते, सो ऽर्थः पुरुषं निःश्रेयसेन संयुनक्तीति प्रतिजानीमहे. चोदना हि भूतं भवन्तं भविष्यन्तं सूक्ष्मं व्यवहितं विप्रकृष्टम् इत्य् एवंजातीयकम् अर्थं शक्नोत्य् अवगमयितुम्, नान्यत् किंचनेन्द्रियम्.