Tag: Hindu Religion

NIRVANA SHATAKAM

निर्वाण षट्कम मनोबुद्धयहंकारचित्तानि नाहम् – न च श्रोत्र जिह्वे न च घ्राण नेत्रे न च व्योम भूमिर्न तेजॊ न वायु: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥1॥ न च प्राण संज्ञो न वै पञ्चवायु: […]

In a 4:1 verdict SC allows entry of women of all ages in Sabarimala temple even in menstruation.

September 28, 2018 -The Supreme Court on Friday lifted a ban that prevented women and girls between the age of 10 and 50 from entering the famous Sabarimala temple in Kerala, holding this centuries-old Hindu religious practice illegal and unconstitutional.

Who said what:-

Dipak Misra, CJI (for himself and A.M. Khanwilkar, J: The exclusionary practice being followed at the Sabrimala temple by virtue of Rule 3(b) of the 1965 Rules violates the right of Hindu women to freely practise their religion and exhibit their devotion towards Lord Ayyappa. This denial denudes them of their right to worship. The right to practise religion under Article 25(1) is equally available to both men and women of all age groups professing the same religion.

Dr Dhananjaya Y Chandrachud (Concurring) : A claim for the exclusion of women from religious worship, even if it be founded in religious text, is subordinate to the constitutional values of liberty, dignity and equality. Exclusionary practices are contrary to constitutional morality;

R.F. Nariman, J. (Concurring) : the custom or usage of prohibiting women between the ages of 10 to 50 years from entering the Sabarimala temple is violative of Article 25(1), and violative of the Kerala Hindu Places of Public Worship (Authorisation of Entry) Act, 1965 made under Article 25(2)(b) of the Constitution. Further, it is also declared that Rule 3(b) of the Kerala Hindu Places of Public Worship (Authorisation of Entry) Rules, 1965 is unconstitutional being violative of Article 25(1) and Article 15(1) of the Constitution of India.

INDU MALHOTRA: The Writ Petition does not deserve to be entertained for want of standing. The grievances raised are non-justiciable at the behest of the Petitioners and Intervenors involved herein.

Read the full judgment 

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः [ DEVI SUKTAM]

Sanskrit अथ तन्त्रोक्तं देविसुक्तम् नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः। नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्मतां ॥१॥ रौद्राय नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः ॥२॥ कल्याण्यै प्रणता वृद्ध्यै सिद्ध्यै […]

Maharishi Dayanand Saraswati on Christianity[ 1875]

जो यह बाइबल का मत है कि वह केवल ईसाइयों का है सो नहीं किन्तु इससे यहूदी आदि भी गृहीत होते हैं। जो यहां तेरहवें समुल्लास में ईसाई मत के विषय में लिखा है इसका यही अभिप्राय है कि आजकल बाइबल के मत में ईसाई मुख्य हो रहे हैं और यहूदी आदि गौण हैं। मुख्य के ग्रहण से गौण का ग्रहण हो जाता है, इससे यहूदियों का भी ग्रहण समझ लीजिये। इनका जो विषय यहां लिखा है सो केवल बाइबल में से कि जिसको ईसाई और यहूदी आदि सब मानते हैं और इसी पुस्तक को अपने धर्म का मूल कारण समझते हैं। इस पुस्तक के भाषान्तर बहुत से हुए हैं जो कि इनके मत में बड़े-बडे़ पादरी हैं उन्हीं ने किये हैं। उनमें से देवनागरी व संस्कृत भाषान्तर देख कर मुझको बाइबल में बहुत सी शंका हुई हैं। उनमें से कुछ थोड़ी सी इस १३ तेरहवें समुल्लास में सब के विचारार्थ लिखी हैं। यह लेख केवल सत्य की वृद्धि औेर असत्य के ह्रास होने के लिये है न कि किसी को दुःख देने वा हानि करने अथवा मिथ्या दोष लगाने के अर्थ ही।

Maharishi Dayanand Saraswati on Islam[ 1875]

चौदहवें समुल्लास   अनुभूमिका (४) जो यह १४ चौदहवां समुल्लास मुसलमानों के मतविषय में लिखा है सो केवल कुरान के अभिप्राय से। अन्य ग्रन्थ के मत से नहीं क्योंकि मुसलमान कुरान पर ही […]

Ashtadhyayi – Panini Sutra [ Hindu]

पाणिनये नमः। SANSKRIT GRAMMAR BY PANINI MUNI अष्टाध्यायी – EIGHT CHAPTERS -IS THE NAME OF THE GRAMMAR Panini explained both Vaidik and Village Languages 4 × 4 = 16 Sub-chapters माहेश्वर-सूत्राणि -14 [9 […]

Kathopanisad [Hindu]

॥ कठोपनिषत् ॥ ॐ ॥ अथ कठोपनिषद् ॥ ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सहवीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु । मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ Part I […]

Isopanisad [Hindu]

॥ ईशोपनिषत् ॥ Santi patha ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥ ॥ अथ ईशोपनिषत् ॥   ॐ ईशा वास्यमिद सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । […]