Bhagavad Gita English Translation- Annie Besant-1907

AMONG the priceless teachings that may be found in the great Hindu poem of the Mahâbhârata, there is none so rare and precious as this—"The Lord's Song." Since it fell from the divine lips of Shrî Krishna on the field of battle, and stilled the surging emotions of his disciple and friend, how many troubled hearts has it quieted and strengthened, how many weary souls has it led to Him!

हिन्दी भाषा की उत्पत्ति-महावीरप्रसाद द्विवेदी-1907

HINDI BHASHA KI UTPATTI-कुछ समय से विचारशील जनों के मन में यह बात आने लगी है कि देश में एक भाषा और एक लिपि होने की बड़ी ज़रूरत है, और हिन्दी भाषा और देवनागरी लिपि ही इस योग्य है। हमारे मुसल्मान भाई इसकी प्रतिकूलता करते हैं। वे विदेशी फ़ारसी लिपि और विदेशी भाषा के शब्दों से लबालब भरी हुई उर्दू, को ही इस योग्य बतलाते हैं। परन्तु वे हमसे प्रतिकूलता करते किस बात में नहीं? सामाजिक, धार्म्मिक, यहाँ तक कि राजनैतिक विषयों में भी उनका हिन्दुओं से ३६ का सम्बन्ध है। भाषा और लिपि के विषय में उनकी दलीलें ऐसी कुतर्कपूर्ण, ऐसी निर्बल, ऐसी सदोष और ऐसी हानिकारिणी हैं कि कोई भी न्यायनिष्ठ और स्वदेशप्रेमी मनुष्य उनसे सहमत नहीं हो सकता। बंगाली, गुजराती, महाराष्ट्र और मदरासी तक जिस देवनागरी लिपि और हिन्दी भाषा को देश-व्यापी होने योग्य समझते हैं वह अकेले मुट्ठी भर मुसल्मानों के कहने से अयोग्य नहीं हो सकती। आबादी के हिसाब से मुसल्मान इस देश में हैं ही कितने? फिर थोड़े होकर भी जब वे निर्जीव दलीलों से फ़ारसी लिपि और उर्दू भाषा की उत्तमता की घोषणा देंगे तब कौन उनकी बात सुनेगा? अतएव इस विषय में और कुछ कहने की ज़रूरत नहीं—पहले ही बहुत कहा जा चुका है। अनेक विद्वानों ने प्रबल प्रमाणों से हिन्दी भाषा और देवनागरी लिपि की योग्यता प्रमाणित कर दी है।

Pastor Aeternus-Concerning the Infallible Teaching of Pope

We teach and define that it is a dogma divinely revealed: that the Roman Pontiff, when he speaks ex cathedra, that is, when in discharge of the office of Pastor and Teacher of all Christians, by virtue of his supreme Apostolic authority, he defines a doctrine regarding faith or morals to be held by the universal Church, is, by the divine assistance promised to him in Blessed Peter, possessed of that infallibility with which the divine Redeemer willed that His Church should be endowed in defining doctrine regarding faith or morals; and that, therefore, such definitions of the Roman Pontiff are of themselves, and not from the consent of the Church, irreformable.

রামায়ণ-রবীন্দ্রনাথ ঠাকুর ১৯০৭ [Ramayan Rabindranath Thakur]

রামায়ণ-মহাভারতকে যখন জগতের অন্যান্য কাব্যের সহিত তুলনা করিয়া শ্রেণীবদ্ধ করা হয় নাই তখন তাহাদের নাম ছিল ইতিহাস। এখন বিদেশীয় সাহিত্যভাণ্ডারে যাচাই করিয়া তাহাদের নাম দেওয়া হইয়াছে ‘এপিক'। আমরা এপিক শব্দের বাংলা নামকরণ করিয়াছি মহাকাব্য। এখন আমরা রামায়ণ-মহাভারতকে মহাকাব্যই বলিয়া থাকি।