Ram Mandir was destroyed by Babar in 1528 CE: Tulshi Ram Das

The destruction of Rammandir in Doha Satak of Tulshi Ram Das

मंत्र उपनिषद ब्रह्माण्हू बहु पुराण इतिहास।
जवन जराए रोष भरी करी तुलसी परिहास।।1

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि क्रोध से ओतप्रोत यवनों ने बहुत सारे मन्त्र (संहिता),उपनिषद, ब्राह्मणग्रन्थों (जो वेद के अंग होते हैं) तथा पुराण और इतिहास सम्बन्धी ग्रन्थों का उपहास करते हुए उन्हें जला दिया।

Shri Tulsidas Ji says that the Yavanas, filled with anger, burned many mantras (samhita), Upanishads, Brahmanas (which are part of the Vedas) and Puranas and history texts.

सिखा सूत्र से हीन करी, बल ते हिन्दू लोग।
भमरी भगाए देश ते, तुलसी कठिन कुयोग।।2

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि ताकत से हिंदुओं को शिखा (चोटी) और यज्ञोपवीत से रहित करके उनको गृहविहीन कर अपने पैतृक देश से भगा दिया।

Shri Tulsidas Ji says that by deviating from the Shikha (peak) and Yagyopaveet of Hindus, he left them homeless and drove them away from their ancestral country.

बाबर बर्बर आइके,कर लीन्हे करवाल ।
हने पचारि पचारि जन,जन तुलसी काल कराल ॥3

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि हाथ में तलवार लिये हुए बर्बर बाबर आया और लोगों को ललकार ललकार कर हत्या की। यह समय अत्यंत भीषण था।

Tulsidas ji says that the barbaric barber with sword in hand came and killed the people in a daunting manner. This time was very fierce.

सम्बत सर वसु बाण नभ, ग्रीष्म ऋतू अनुमानि।
तुलसी अवधहि जड़ जवन, अनरथ किये अनमानि।।4 

सर (शर)=5, वसु =8, बान (वाण)=5, नभ =1 अर्थात् विक्रम सम्वत् 1585 और विक्रम सम्वत् में से 57 वर्ष घटा देने से ईस्वी सन 1528 आता है। श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि सम्वत् 1585 विक्रमी (सन् 1528ई.) अनुमानतः ग्रीष्मकाल में जड़ यवनों ने अवध में वर्णनातीत (वर्णन न करने योग्य) अनर्थ किये।

Tulsidas ji says that Samvat 1585 Vikrami (AD 1528) supposedly committed an indefinite disaster in the summer months in Awadh. (Inexplicable).

रामजनम महीन मंदिरहिं, तोरी मसीत बनाए।
जवहि बहु हिंदुन हते, तुलसी किन्ही हाय।।5

जन्मभूमि का मन्दिर नष्ट करके, उन्होंने एक मस्जिद बनाई। साथ ही तेज गति से उन्होंने बहुत से हिंदुओं की हत्या की। यह सोचकर तुलसीदास जी शोकाकुल हुये।

By destroying the temple of Janmabhoomi, they built a mosque. At the same time, he killed many Hindus at a high speed. Thinking this, Tulsidas was upset.

दल्यो मीरबाकी अवध मंदिर राम समाज।
तुलसी ह्रदय हति, त्राहि त्राहि रघुराज।।6

मीरबाकी ने मन्दिर तथा रामसमाज (राम दरबार की मूर्तियों) को नष्ट किया। राम से रक्षा की याचना करते हुए विदीर्ण हृदय से तुलसी रोये।

Mir Baqi destroyed the temple and Ramsamaj (idols of Rama Darbar). Praying for protection from Rama, weeping heartless Tulsi cried.

रामजनम मंदिर जहँ, लसत अवध के बीच।
तुलसी रची मसीत तहँ, मीरबांकी खाल नीच।।7

तुलसीदास जी कहते हैं कि अयोध्या के मध्य जहाँ राममन्दिर था वहाँ नीच मीरबाकी ने मस्जिद बनाई।

Tulsidas ji says that satanik Mir Baqi built a mosque in the middle of Ayodhya where there was a Ram temple.

रामायण घरी घंट जहन, श्रुति पुराण उपखान।
तुलसी जवन अजान तहँ, कइयों कुरान अजान।।8

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि जहाँ रामायण, श्रुति, वेद, पुराण से सम्बंधित प्रवचन होते थे, घण्टे-घड़ियाल बजते थे,वहाँ अज्ञानी यवनों की कुरान और अजान होने लगी।

Tulsidas ji says that where there were discourses related to Ramayana, Shruti, Vedas, Puranas, bells, gharial were played, there were Quran and Azan of ignorant people.


As per doha number 4 the temple was destroyed onसम्वत् 1585 विक्रमी (सन 1528 ई) , It was summer season

Source: Tulsi Doha Satak

Tulsi Das ji was contemporary of Babar wrote Doha Satak in 1590. Its eight couplets, 85 to 92, clearly describe the demolition of the temple. It was published in 1944 by Talukdar Rai Bahaduth Babu Singh Ji of Rae Bareli. It was printed by Ram Jantralaya Press. It was printed only once and a copy of it is available in the village of Shaindikhurd in Jaunpur.