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शाण्डिल्य भक्ति सूत्र-Sandilya Bhakti Sutra-OSHO Explained

भक्ति जीवन का परम स्वीकार है। इसलिए शुभ ही है कि शांडिल्य अपने इस अपूर्व सूत्र—ग्रंथ का उदघाटन ओम से करते हैं। ठीक ही है, क्योंकि भक्ति जीवन में संगीत पैदा करने की विधि है। जिस दिन तुम संगीतपूर्ण हो जाओगे; जिस दिन तुम्हारे भीतर एक भी स्वर ऐसा न रहेगा जो व्याघात उत्पन्न करता है; जिस दिन तुम बेसुरे न रहोगे, उसी दिन प्रभु मिलन हो गया।

Narada Pancha Ratra Samhita

श्रीनारदपञ्चरात्रम् प्रथमैकरात्रे प्रथमोऽध्यायः ओं नमो भगवते वासुदेवाय अथ मङ्गलाचरणम् नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् । देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत् ॥ गणेशशेषब्रह्मेशदिनेशप्रमुखाः सुराः । कुमाराद्याश्च मुनयः सिद्धाश्च कपिलादयः ॥ १,१.१ ॥ लक्ष्मी […]