';

KAMAYANI

उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित कालरात्रि भी जल में अंतर्निहित हुई । वह विवर्ण मुख...
हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह, एक पुरुष, भींगे नयनों से देख रहा था...