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ऋग्वेद भाष्यम् – Rig Veda Bhashyam by Sayanacharya

Vishnu is the source of Manu Samhita
ऋग्वेद सायणभाष्यम्, 1316-1388 CE के दौरान लिखा गया, वेदों की प्राप्ति में तपस्या का महत्व बताता है। इसमें स्वयंभू व vedपुरुष से संबंधित विचार प्रस्तुत हैं। यह नोट करता है कि ऋषि और तपस्वी महर्षियों ने युगान्त में वेदों को प्राप्त किया। वेद का ज्ञान सावधानीपूर्वक ग्रहण करना आवश्यक है, अन्यथा अनुचित परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। विभिन्न तत्वों जैसे स्वर, वर्ण, अक्षर और मात्रा को वेद में शामिल किया गया है। विषय वस्तु का सही समझना श्रद्धा और योग के माध्यम से संभव है, और प्रत्येक मंत्र का गहन अध्ययन आवश्यक माना गया है।

ऋग्वेद सायणभाष्यम्

1316-1388 CE

वेदप्राप्त्यर्थं तपोऽनुतिष्ठतः पुरुषान् स्वयंभूर्वेदपुरुषः प्राप्नोत् । तथा च श्रूयते– अजान्ह वै पृश्नींस्तपस्यमानान्ब्रह्म स्वयंभ्वभ्यानर्षत्तदृषयोऽभवन्’ (तै. आ. २. ९ ) इति । तथातीन्द्रियस्य वेदस्य परमेश्वरानुग्रहेण प्रथमतो दर्शनात् ऋषित्वमित्यभिप्रेत्य स्मर्यते

युगान्तेऽन्तर्हितान् वेदान् सेतिहासान् महर्षयः । लेभिरे तपसा पूर्वमनुज्ञातः स्वयंभुवा ॥ इति ॥ ऋष्यादिज्ञानाभावे प्रत्यवायः स्मर्यते—अविदित्वा ऋषिं छन्दो दैवतं योगमेव च। योऽध्यापयेज्जपेद्वापि पापीयाञ्जायते तु सः ॥ ऋषिच्छन्दोदैवतानि ब्राह्मणार्थं स्वराद्यपि ।। अविदित्वा प्रयुञ्जानो मन्त्रकण्टक उच्यते ॥ इति ॥ वेदनविधिश्च स्मर्यते– स्वरो वर्णोऽक्षरं मात्रा विनियोगोऽर्थ एव च । मन्त्रं जिज्ञासमानेन वेदितव्यं पदे पदे ॥ [ सायण-1.1.1]

Alphabetical Index of the Rig Veda Mantras [PDF]

  1. Rig Veda First Mandala [ऋग्वेद ]
  2. Rig Veda Second Mandala ऋग्वेद
  3. Rig Veda Third Mandala [ऋग्वेद]
  4. Rig Veda Forth Mandala[ऋग्वेद]
  5. Rig Veda Fifth Mandala [ऋग्वेद]
  6. Rig Veda Sixth Mandala [ऋग्वेद]
  7. Rig Veda Seventh Mandala[ऋग्वेद]
  8. Rig Veda Eighth Mandala [ऋग्वेद]
  9. Rig Veda Ninth Mandala [ऋग्वेद]
  10. Rig Veda Tenth Mandala [ऋग्वेद]

 


ऋग्वेदसंहिता सायणभाष्यम्


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