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मेरी प्रिय पुस्तकें- My Favourite Books – OSHO

मौन अपने ही ढंग से बोलता है, आनंद का, शांति का, सौंदर्य का और आशीषों का अपना ही गीत गाता है; अन्यथा न तो कभी कोई ‘ताओ तेह किंग’ घटित होती और न ही कोई ‘सरमन ऑन दि माउंट।’ इन्हें मैं वास्तविक काव्य मानता हूं जब कि इन्हें किसी काव्यात्मक ढंग से संकलित नहीं किया गया है। ये अजनबी हैं। इन्हें बाहर रखा गया है। एक तरह से यह सच भी है: इनका किसी रीति, किसी नियम, किसी मापदंड से कुछ लेना-देना नहीं है; ये उन सबके पार हैं, इसलिए इन्हें एक किनारे कर दिया गया है।

अथातोभक्तिजिज्ञासा-Explanation of Sandilya Bhakti Sutram by OSHO

ओम् अथातोभक्तिजिज्ञासा।।1।।
सापरानुरक्तिरीश्वरे।।2।।
तत्संस्थास्यामृतत्वोपदेशात्।।3।।
ज्ञानमितिचेन्नद्विषतोऽपिज्ञानस्यतदसस्थिते:।।4।।
तयोपक्षयाच्च।। 5।।

संतति-नियमन या परिवार नियोजन-OSHO

गरीब की सबसे बड़ी जो दुविधा है, वह है प्राइवेसी का अभाव–भोजन नहीं, कपड़े नहीं। गरीब का सबसे बड़ा दुख है कि उसकी प्राइवेट जिंदगी नहीं हो सकती। वह अगर अपनी पत्नी से भी बात कर रहा हो तो भी पड़ोसी सुनता है। वह अपनी पत्नी से भी प्रेम नहीं कर सकता बिना इसके कि उसके बेटे-बेटी जान लें। गरीब की सबसे बड़ी तकलीफ है कि वह अकेले में नहीं हो सकता। उसकी प्राइवेसी जैसी कोई चीज नहीं है।

देखा तो हर मुकाम तेरी रहगुजर में है-एस धम्‍मो सनंतनो- Esha Dhammo Sanatana-OSHO

खोपड़ी से मुक्त होने का खयाल भी खोपड़ी का ही है। मुक्त होने की जब तक आकांक्षा है, तब तक मुक्ति संभव नहीं। क्योंकि आकांक्षा मात्र ही, आकांक्षा की अभीप्सा मन का ही जाल और खेल है। मन संसार ही नहीं बनाता, मन मोक्ष भी बनाता है। और जिसने यह जान लिया वही मुक्त हो गया।

Saral Hindi Vidhi Vakya Kosha by Legislative Dept Govt of India:१०० सरल हिंदी विधि बाक्य कोष

१०० सरल हिंदी विधि बाक्य कोष : लेजिस्लेटिव डिपार्टमेंट गोवेर्मेंट ऑफ़ भारत देवनागरी अक्षरमाला SIMPLE HINDI SENTENCES(PDF) Saral Hindi Vakyakosh SIMPLE HINDI SENTENCES(PDF)

आशा-जयशंकर प्रसाद-Asha -Jaishankar Prasad

उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई,
उधर पराजित कालरात्रि भी जल में अंतर्निहित हुई ।
वह विवर्ण मुख त्रस्त प्रकृति का आज लगा हँसने फिर से ,
वर्षा बीती, हुआ सृष्टि में शरद-विकास नये सिर से।

चिंता-जयशंकर प्रसाद-CHINTA -Jaishankar Prasad

हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह,
एक पुरुष, भींगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह ।
नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन,
एक तत्व की ही प्रधानता-कहो उसे जड़ या चेतन ।

ईश्वरनामव्याख्या-The Name of Iswara- Dayananda Saraswati

ओंकार शब्द परमेश्वर का सर्वोत्तम नाम है ओ३म्सच्चिदानन्देश्वराय नमो नमःअथ सत्यार्थप्रकाशः॥ ओ३म् शन्नो॑ मि॒त्रः शं वरु॑णः॒ शन्नो॑भवत्वर्य्य॒मा । शन्न॒इन्द्रो॒बृह॒स्पति॑ शन्नो॒ विष्णु॑रुरुक्र॒मः ॥ नमो॒ ब्रह्म॑णे नम॒स्ते वायो त्वमे॒व प्र॒त्यक्षं॒ ब्रह्ना॑ति । त्वामे॒व प्र॒त्यक्षं॒ […]

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम २०१ ९

अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय से संबंधित कोई भी व्यक्ति, जो दिसंबर, 2014 के 31 वें दिन या उससे पहले भारत में प्रवेश कर गया हो इस पर बनाए गए किसी भी नियम या आदेश को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा

Chinta – hindi poetry by Jaisankar Prasad

हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह, एक पुरुष, भींगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह । नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन, […]