Sacred Texts Hindu

Veda Mantra Samhitas of Sanatan Dharma[वेद मंत्र संहिता]

RIG VEDA MANTRA SAMHITA

First Mantram of Rig Veda

अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवं रत्वीजम |
होतारं रत्नधातमम ||
अग्निः पूर्वेभिर्र्षिभिरीड्यो नूतनैरुत |
स देवानेह वक्षति ||
अग्निना रयिमश्नवत पोषमेव दिवे-दिवे |
यशसं वीरवत्तमम ||
अग्ने यं यज्ञमध्वरं विश्वतः परिभूरसि |
स इद्देवेषु गछति ||
अग्निर्होता कविक्रतुः सत्यश्चित्रश्रवस्तमः |
देवो देवेभिरा गमत ||
यदङग दाशुषे तवमग्ने भद्रं करिष्यसि |
तवेत तत सत्यमङगिरः ||
उप तवाग्ने दिवे-दिवे दोषावस्तर्धिया वयम |
नमो भरन्त एमसि ||
राजन्तमध्वराणां गोपां रतस्य दीदिविम |
वर्धमानंस्वे दमे ||
स नः पितेव सूनवे.अग्ने सूपायनो भव |
सचस्वा नः सवस्तये ||

Last Mantram

सं-समिद युवसे वर्षन्नग्ने विश्वान्यर्य आ |
इळस पदेसमिध्यसे स नो वसून्या भर ||
सं गछध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम |
देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते ||
समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम |
समानं मन्त्रमभि मण्त्रये वः समानेन वोहविषा जुहोमि ||
समानी व आकूतिः समाना हर्दयानि वः |
समानमस्तु वोमनो यथा वः सुसहासति ||

Rig Veda Samhita in Devanagari Script

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SAM VEDA MANTRA SAMHITA [Sam Veda]

YAJUR VEDA MANTRA SAMHITAS [Shukla Yajur Veda Samhita in Devanagari Script

  • VÂJASANEYA-SAMHITÂ [ Yajur Veda]
  • TAITTIRIYA-SAMHITÂ
  • KANDVA -SAMHITÂ

ATHARVA VEDA MANTRA SAMHITA [Athar Veda ]