front page Forums तत्वविवेकप्रकरणम् From पंचदशी by विद्यारण्य (Tatva vivek prakarana of Panchadasi by Vidyaranya)

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    advtanmoy
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    Date: 1375 नमः श्रीशङ्करानन्दगुरुपादाम्बुजन्मने | सविलासमहामोहग्राहग्रासैककर्मणे ||१|| तत्पादाम्बुरुहद्वङ्द्वसेवानिमर्लचेतसाम् | सुखबोधाय तत्त्वस्य वि
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    #129462
    advtanmoy
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    USNISA VIJAYA DHARINI

    Buddha Tantra

    नमो भगवते त्रैलोक्य प्रतिविशिष्टाय बुद्धाय भगवते। तद्यथा ॐ विशोधय विशोधय। असमसम समन्तवभास स्फरण गति गहन स्वभाव विशुद्धे। अभिषीञ्चतु मां। सुगत वर वचन। अमृताभिषेकै महामन्त्र पदै। आहर आहर आयुः सन्धारणि। शोधय शोधय गगन विशुद्धे। उष्णीष विजय विशुद्धे। सहस्ररश्मि सञ्चोदिते। सर्व तथागतावलोकनि षट्पारमिता परिपूरणि। सर्व तथागत मति दशभूमिप्रतिष्ठिता । सर्व तथागत हृदयाधिष्ठानाधिष्ठित महामुद्रे। वज्रकाय संहतन विशुद्धे। सर्व-आवरणापायदुर्गति परिविशुद्धे। प्रतिनिवर्तय-आयुः शुद्धे। समयाधिष्ठिते मणि मणि महामणि। तथता भूतकोटि परिशुद्धे। विस्फुट बुद्धि शुद्धे। जय जय। विजय विजय। स्मर स्मर। सर्व बुद्धाधिष्ठित शुद्धे। वज्रे वज्रगर्भे वज्रं भवतु मम शरीरं। सर्व सत्त्वानां च काय परिविशुद्धे। सर्व गति परिशुद्धे। सर्व तथागताश्च मे सम-आश्वासयन्तु। सर्व तथागत सम-आश्वासाधिष्ठिते। बुध्य बुध्य। विबुध्य विबुध्य। बोधय बोधय। विबोधय विबोधय। समन्त परिशुद्धे। सर्व तथागत हृदयाधिष्ठानाधिष्ठित महामुद्रे स्वाहा॥

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