Yogi Breathing

Man in his normal state had no need of instruction in breathing. Like the lower animal and the child, he breathed naturally and properly, as nature intended him to do, but civilization has changed him in this and other respects. He has contracted improper methods and attitudes of walking, standing and sitting, which have robbed him of his birthright of natural and correct breathing. He has paid a high price for civilization. The savage, to-day, breathes naturally, unless he has been contaminated by the habits of civilized man.

Hatha Yoga Pradipika-English Translation

Salutation to Âdinātha (Siva) who expounded the knowledge of Hatha Yoga, which like a staircase leads the aspirant to the high pinnacled Rāja Yoga. Yogin Swātmārāma, after saluting her Gurû Srinātha explains Hatha Yoga for the attainment of Rāja Yoga.

India opted for Yoga-Naturopathy for Psychosocial Rehab of Covid-19 Patients

As per reports, the accompanying psychologic distress in covid 19 patients are often ignored and not managed. There have also been reports of anxiety and acute depression leading to suicides in Covid care hospitals. Many of the patients, according to inputs coming in from different countries, have had to contend with isolation anxiety and distress due to fear of worsening of symptoms. Complications like respiratory distress, hypoxia, fatigue and insomnia and other symptoms have also been observed.

National Clinical Management Protocol based on Ayurveda and Yoga for management of Covid-19 was released

The National Clinical Management Protocol based on Ayurveda and Yoga   DATE: 06 OCT 2020   The National Clinical Management Protocol based on Ayurveda and Yoga for the management of Covid-19 was released jointly by Dr. Harsh Vardhan, Union Minister…

आयुष मंत्रालय ने कार्य स्थल पर ‘योग हेतु अवकाश’(योग ब्रेक) की शुरुआत की

आयुष मंत्रालय ने कार्य स्थल पर ‘योग हेतु अवकाश’(योग ब्रेक) की फिर शुरुआत की DATE: 25 SEP 2020 आयुष मंत्रालय के योग ब्रेक प्रोटोकॉल से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आज से पुणे योग ब्रेक की शुरुआत हो…

आमरौघ शासन – गोरक्षनाथ Amarogh Sasana of Goraksha Nath

अथाधारणकर्मोदितशङ्खिनीभेदव्यवस्थाव्याख्या गुदमेढ्रान्तरे त्रिकोणत्रिधावर्तभगमण्डलमुच्यते तत्र आधारग्रन्थय एकद्वित्रयश्चेति एकद्वित्रयाणां मध्ये ग्रन्थीनामुपान्तरे चतुष्पत्रं पद्ममधोमुखं तिष्ठति तत्र कर्णिकामध्ये मृणालसूत्रपरिमाणा शङ्खावर्ता तत्र प्रवालाङ्कुरसन्निभा द्वित्रिनाडीभूता कुण्डलिनी शक्तिः चैतन्यबीजमुखं गत्वा सुप्ता

ईश्वरप्रणिधानाद्वा( 23) Iswar Pranidhanad Ba-पंतजलि: योगसूत्र- Explanation by OSHO

 तुम बीज हो, और परमात्मा प्रस्‍फुटित अभिव्यक्ति है। तुम बीज हो और परमात्मा वास्तविकता है। तुम हो संभावना; वह वास्तविक है। परमात्मा तुम्हारी नियति है, और तुम कई जन्मों से अपनी नियति पास रखे हुए हो बिना उसकी ओर देखे। क्योंकि तुम्हारी आंखें कहीं भविष्य में लगी होती हैं; वे वर्तमान को नहीं देखतीं। यदि तुम देखने को राजी हो तो यहीं, अभी, हर चीज वैसी है जैसी होनी चाहिए। किसी चीज की जरूरत नहीं। अस्तित्व संपूर्ण है हर क्षण। यह कभी अपूर्ण हुआ ही नहीं; यह हो सकता नहीं। यदि यह अपूर्ण होता, तो यह संपूर्ण कैसे हो सकेगा? फिर कौन इसे संपूर्ण बनायेगा?

योगस्थानानि – yoga sthanai

संक्षेपतः प्रवक्ष्यामि योगस्थानानि साम्प्रतम् । कल्पितानि शिवेनैव हिताय जगतां द्विजाः ॥ १,८.१ ॥ गलादधो वितस्त्या यन्नाभेरुपरि चोत्तमम् । योगस्थानमधो नाभेरावर्तं मध्यमं भ्रुवोः ॥ १,८.२ ॥ सर्वार्थज्ञाननिष्पत्तिरात्मनो योग उच्यते । एकाग्रता भवेच्चैव सर्वदा तत्प्रसादतः ॥ १,८.३ ॥ प्रसादस्य स्वरूपं यत्स्वसंवेद्यं द्विजोत्तमाः ।…

चित्तवृत्तिनिरोधः – Chitta Vritti Nirodha

योग:  चित्तवृत्तिनिरोधः॥1.2॥ योगश् चित्तवृत्तिनिरोधः। निरुध्यन्ते यस्मिन् प्रमाणादिवृत्तयो ऽवस्थाविशेषे चित्तस्य सोऽवस्थाविशेषो योगः। ननु संप्रज्ञातस्य योगस्याव्यापकत्वाद् अलक्षणम् इदम्। अनिरुद्धा हि तत्र सात्त्विकी चित्तवृत्तिर् इत्य् अत आह --- सर्वशब्दाग्रहणाद् इति। यदि सर्वचित्तवृत्तिनिरोध इत्य् उच्येत भवेद् अव्यापकं संप्रज्ञातस्य। क्लेशकर्मविपाकाशयपरिपन्थी चित्तवृत्तिनिरोधस् तु तम् अपि संगृह्णाति।…

यमनियमाः- Yama-niyama

अग्निरुवाच संसारतापमुक्त्यर्थं वक्ष्याम्यऽष्टाङ्गयोगकं । ब्रह्मप्रकाशकं ज्ञानं योगस्तत्रैकचित्तता ।। ३७२.१ ।। चित्तवृत्तिनिरोधश्य जीवब्रह्मात्मनोः परः । अहिसा सत्यमस्तेयं ब्रह्मचर्य्यापरिग्रहौ ।। ३७२.२ ।। यमाः पञ्च स्मृता विप्र नियमाद्‌ भुक्तिमुक्तिदाः । शौचं सन्तोषतपसी स्वाध्यायेश्वरपूजने ।। ३७२.३ ।। भूतापीड़ा ह्यहिंसा स्यादहिंसा धर्म्म उत्तमः । यथा…

हठयोग – Hatha Yoga

हठयोग पु० हठेन बलात्कारेण योगः । प्राणायामादिक्रियाभ्यासजे राजयोगं विनैव परमात्मसाक्षात्काररूपे चित्तवृत्तिरोधात्मके योगे । योगश्च द्विविधः हठयोगः राजयोगश्च । तत्र हठयोगः क्रियाविशेषसाध्यः हठदीपिकादावुक्तप्रकारः । राजयो- गस्तु भावनाविशेषसाध्यः पातञ्जलादावुक्तः । स च पतञ्जश्चिशब्दे दर्शितः । हठयोगोऽत्र साङ्गाऽभिधीयते तत्साधनप्रशंसादिः उभवयोगयोरपि परपरसापेक्षतया एककार्य्याकरत्वम् ।…