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Hindi poetry

जनगणमन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता! पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंग तव...
उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित कालरात्रि भी जल में अंतर्निहित हुई । वह विवर्ण मुख...
हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह, एक पुरुष, भींगे नयनों से देख रहा था...